संदेश

पुरुष यानी पौरुष

 #InternationalMensDay #पुरुष #दिवस  पुरुष मतलब पौरुष..!! पौरुष मतलब ताक़त..!! वह ताक़त नहीं जिससे वो लड़ाई कर सके..!! वह ताकत जो उसे दुःख सहने में मदद कर सके..!! जी हाँ आज विश्व पुरुष दिवस है, जिसकी बधाई देते हुए यदि कोई महिला दिख जाए तो उसको सम्मान देना न भूलिएगा क्योंकि ये समाज पुरुष प्रधान समाज है, क्यों मातृ शक्तियों ठीक कहाँ न..?? पुरूष महिलाओं को लेकर काफ़ी चिंतित दिखाई देता है, जन्म से लेकर अपनी मां के लिए चिंतित, समझदार होने पर अपनी बहनों के लिए चिंतित, युवा होने पर अपनी पत्नी/प्रेमिका/प्रेयसी के लिए चिंतित, परिपक्व होने पर समाज की दशा/दिशा के लिए चिंतित..!! मतलब कि सारा चिंतन मनन का सम्पूर्ण भार पुरूष ने ले रखा है, और जब कभी लांछन लगाने की बारी आये तो उसका भी सारा दारोमदार उसी पुरुष का...लड़का है तो गलती उसी की होगी, छेड़ने की सारी कलाएं सिर्फ पुरुष के अंदर ही विद्यमान होती है ऐसा इस समाज ने स्वीकार कर लिया है, नशेड़ी, गंजेड़ी, लौंडियाबाज, अय्याश और न जाने कितने नामों से पुकारा जाने वाला पुरुष बड़ी ही सहजता से महिलाओं के लिए सम्मान पूर्वक हर एक त्योहार पर उनके आदर सम्मान में ...

राजनीतिक भ्रम

सामाजिकता और नैतिकता दोनों बहने एक बार फिर पीछे के दरवाजे से झांकती हुई..!! काश कोई मेरे बारे में सोचता..!! राजनीति ने दोनों बहनों को ठिकाने लगाने की पुरजोर कोशिश कर दी है..!! मणिपुर, मुर्शिदाबाद व कश्मीरियत के बाद अब जातीय जनगणना...अब नेतागण बताएंगे कि ये हमने कहां, ये हमने मांगा..!! और राजनीति ठहाका लगाते हुए दोनों बहनों को ठिकाने लगा चुकी होगी..!! कौन है ये राजनीति, कहां से आती है और कितना प्रभाव डालती है..!! ये सब जानने के लिए आपको सोचना होगा और आप सोचें उससे पहले राजनीति के बड़े बेटे मीडिया द्वारा आपको भ्रमित कर दिया जाएगा, हो सकता है कि आपके पास बड़ा बेटा न पहुंच पाया तो छोटा बेटा मोबाइल तो पहुंच ही जाएगा और सोशल मीडिया जैसे दोस्तों की फौज आपकी कराएगी मौज..!! क्या हुआ कुछ सोच नहीं पाए न, ऐसा ही होता आ रहा है कई वर्षों से और अब तो इतना हावी हो चुका है कि आपको ये पढ़ने में अच्छा लगेगा, ओढ़ने में भी अच्छा लगेगा..!! पर सच सुनिए, कोढ़ है ये राजनीति...जिस जिस को इसने निशाना बनाया उसको खत्म कर डाला फिर चाहे उसका खुद का परिवार ही क्यों न हो..!! वक्त हो चला है दोनों बहनों से मिल...

जगत प्रेम

 सुनिए.....सोचिये.....समझिये.....बोलिये....!! अपने हक़ व अधिकारों के लिए..!! नहीं तो सब लूट जाएगा..!! जनता का सरंक्षण ही असली राष्ट्रवाद है..!! और वो तभी सम्भव है जब व्यापार में भी प्यार निहित होगा..!! देश में अनेक विचारधारायें व्याप्त है, यूं कह लीजिए कि धर्म व्याप्त है..!! सभी को अपनी अपनी कहनी कथनी है..!! सबकी अपनी अपनी कहानी है..!! किसी को किसी की न तो सुननी है और न माननी है..!! पर यकीन मानिए सब में एक ही बात लिखी है..!! जिंदा रहने के लिए तेरी कसम, एक मुलाकात जरूरी है सनम..!! ये सिर्फ एड था..!! पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त..!! किसी भी विचारधारा में कट्टरता का भावावेश नहीं, सभी में प्रेम का चित्रण अनुकूल व विपरीत परिस्थितियों में पढ़ा जा सकता है..!! ऐसे में जो कट्टरता आपको वर्षों से सुनाई या बतलाई जा रही है, वो सिर्फ उसी भावावेश को बदलने मात्र के लिए है..!! अगर कोई भी विचारधारा कट्टरता से परिपूर्ण होगी तो उसका अंत निश्चित है...क्योंकि कट्टरता में हिंसा होना लाज़िमी है, और जहां हिंसा ने जन्म लिया वहां प्रकृति का क्षय होना तय है...वह प्रकृति जिसमें आपका जन्म है, वह प्रकृति जिससे आपक...

जीवन जीने की आस

 जीवन अकेला बहुत आसान है, सामाजिक बोझ के तले बहुत मुश्किल..!! "सोचो ईश्वर हमें कैसे पालता होगा..!! हर मुश्किल वो कैसे टालता होगा..!! कोई न कोई ख़ास बात तो होगी तुममे..!! इसीलिए तो ये बोझ ईश्वर तुम पर डालता होगा..!!" मेरे प्रिय सभी मानवों, आप यदि आज किसी उलझन में तो, जरूर ईश्वर आपको सुलझाने का प्रयास कर रहा है..!! तो हिम्मत हारकर गलत राह पर नहीं जाना है..!! ईश्वर के बनाये सदमार्ग पर ही चलना है..!! वो भी रक्त की आख़िरी बून्द तक..!! © निखिल स्वतंत्र युवा

बलात्कार- एक मानसिक बीमारी

 बलात्कार कभी न ख़त्म होने वाला कुकर्म है, चाहे इसके लिए कितनी भी बड़ी सज़ा क्यों न बना दी जाए..?? क्योंकि ये पूरा विश्व ही पुरुष प्रधान है...!! ये आज भी औरतों को सिर्फ प्रयोग की चीज़ समझता है..!! और ये मैं इसलिए लिख रहा हूँ क्योंकि हर रोज बलात्कार के बढ़ते मामले देख रहा हूँ..!! हर रोज अखबार के किसी न किसी पन्ने में, सोशल मीडिया के किसी लिंक में देखने को मिल जा रहा..!! क्या आपको पता है कि इस अपराध का कारण क्या है..? अगर नहीं तो ठीक है...और अगर हाँ तो आपने अब तक इसके सुधार के लिए कुछ किया क्या..?? क्या सोच रहे है..नहीं किया, क्योंकि अगर किया होता तो ये कम हो रहा होता, न कि दुगुनी तेजी से बढ़ रहा होता..!! हमने 2018 में प्रयास किया, फिर 2019 में भी प्रयास किया, उसके बाद से लगातार निरंतर प्रयास में हूँ, कि काश लोगों को समझ आ जाये कि अपराध का कारण क्या है और उसको जड़ से कैसे खत्म किया जा सकता है..?? लेकिन कौन है सुनने वाला, कौन है पढ़ने वाला..? कुछ चंद लोग जो 2018 में मेरे आहवाहन पर आए थे, उसमें से बचे कुछ लोग जो 2019 में मेरे साथ खड़े थे...और आज उनमें से बस कुछ लोग जो शायद अब परिवार में व्यस्त ...

भावुकता

 विनोद हाईवे पर गाड़ी चला रहा था... सड़क के किनारे उसे एक 12-13 साल की लड़की तरबूज बेचती दिखाई दी... विनोद ने गाड़ी रोक कर पूछा "तरबूज की क्या रेट है बेटा? " लड़की बोली  "50 रुपये का एक तरबूज है साहब..." पीछे की सीट पर बैठी विनोद की पत्नी बोली  "इतना महंगा तरबूज नही लेना जी...चलो यहाँ से..." विनोद बोला "महंगा कहाँ है... इसके पास जितने तरबूज है कोई भी पांच किलो के कम का नही होगा... 50 रुपये का एक दे रही है तो 10 रुपये किलो पड़ेगा हमें... बाजार से तो तू बीस रुपये किलो भी ले आती है... " विनोद की पत्नी ने कहा ''तुम रुको मुझे मोल भाव करने दो...” फिर वह लड़की से बोली  "30 रुपये का एक देना है तो दो वरना रहने दो..."  लड़की बोली "40 रुपये का एक तरबूज तो मै खरीद कर लाती हूँ आंटी...आप 45 रुपये का एक ले लो...इससे सस्ता मै नही दे पाऊँगी..." विनोद की पत्नी बोली "झूठ मत बोलो बेटा...सही रेट लगाओ... देखो ये तुम्हारा छोटा भाई है न? इसी के लिए थोड़ा सस्ता कर दो..."  उसने खिड़की से झाँक रहे अपने चार वर्षीय बेटे की तरफ इशारा करते...

प्रेम ही जीवन है..!!

 जब मानव बच्चा होता है तो किसी भी प्रकार के भेदभाव को नहीं जानता, वह जानता है तो सिर्फ प्रेम की बोली...और उसे जो प्यार से पुचकारता है वो बच्चा उसी के पास चला जाता है..!! समय के साथ बच्चा बड़ा होता है, हर तरीके का भेदभाव सीखता है..!! लेकिन बचपन की तरह जिस तरफ से प्रेम पाता है, उधर ही चला जाता है..!! क्योंकि मानवीय प्रकृति ही है जो अपनापन महसूस करती है ढेर सारे भेदभावों से परिपूर्ण..!! मन में ढेर सारा अविश्वास लिए जीता मानव..!! ऐसा नहीं लगता आप लोगों को, कि आप अभी जितना जानते है वो कम है..!! अभी और जानने की आवश्यकता है आपको..!! कितना समझ पाते है आप दूसरों को, खुद को..!! अगर नहीं समझ पाते तो सीखिए फिर आंकिये..!! बात बात पर खुद को या दूसरों को ग़लत ठहराने से इस मानवीय प्रकृति का ही नुकसान होगा..!! मैंने 15 सालों में हजारों केस देखें है, जहां पर मात्र एक अविश्वास से घर टूटे थे..!! मैंने देखा था, भाइयों को भाइयों के साथ लड़ते चंद ग़ज़ जमीन के लिए, सास को बहु से लड़ते, भाई को बहन से लड़ते, दोस्त को दोस्त से लड़ते, पति को पत्नी से लड़ते, अजनबी को अजनबी से लड़ते..!! आख़िर मिल क्या गया लड़कर...?? ये सवा...

उधेड़बुन

 "कई दिनों से #उधेड़बुन में हूँ..!!" जीवंत जीवन के यथार्थ को समझ पाने का साहस करते हुए क़लम को कागज़ से स्पर्श कराया था..!! जहन के एहसासों को लिखते लिखते मन में सुकून भी आया था..!! "पर कई दिनों से उधेड़बुन में हूँ..!!" वर्षों पूर्व जिस प्रतियोगिता से स्वयं को अलग कर हमने सुकून पाया था..!! वही प्रतियोगिता अब हर दिन एहसासों में, बातों में मुझे किसी ने सुनाया था..!! "इसीलिये कई दिनों से उधेड़बुन में हूँ..!!" हर चाल मेरी मेरे नाम की निशानी थी..!! जो मेरे इर्द गिर्द के हर बच्चे की जुबानी थी..!! आंदोलनकारी, क्रांतिकारी ऐसी मेरी कहानी थी..!! लिखते लिखते मैं कुछ यूं लिख गया कि पढ़ने वालों के मन में ही रुक गया...किसी ने पढ़कर जाना मुझे, किसी ने पढ़कर माना मुझे..!! "पर कई दिनों से उधेड़बुन में हूँ..!!" राजनीति जिससे मैं लोगो के दिल पर राज कर सकूं, ऐसी करनी थी मुझको..!! शिक्षानीति जिसमें व्यक्तित्व का निखार हो,  ऐसी करनी थी मुझको..!! पर लोगों को ये रास न आई क्योंकि टेक्नोलॉजी ने जीवनचक्र की गति यूं बढ़ाई, कि सबकी होने लगी कमाई..!! मैंने दी सबको बधाई...खिलाई सबको मिठा...

काल का गाल

 मैं निखिल स्वतंत्र युवा, सुमन सदन का महामंडलेश्वर, ईश्वर की शपथ लेते हुए आपको बताना चाहता हूँ.!! कि राजनीति आप सभी के साथ हो रही है..!! राजनीति को समझने के लिए किताबों का सहारा लें..!! फिर चाहे वो किताब गीता हो या कुरान हो..!!                    सामान्य ज्ञान हो या विज्ञान हो..!! हो कोई भी चालीसा या हो किसी गुरु की वाणी..!! हर किसी की होती है, अपनी अपनी कहानी..!! न सिर्फ भारत देश अपितु, पूरा विश्व इस वक़्त आर्थिक मंदी के घेरे में है..!! और उसी के मद्देनजर, राजनीति में धर्म, रंग, लिंग, जाति, सम्प्रदाय के भेद बताये जा रहे है..!! कोई देश काले गोरे का भेद बताकर लड़ा रहा, कोई देश लड़का लड़की का भेद बताकर लड़ा रहा, कोई देश यहूदी, मुस्लिम का भेद बताकर लड़ा रहा, कोई देश हिन्दू, मुस्लिम का भेद बताकर लड़ा रहा, इतना ही नहीं अब बात भाई भाई को लड़ाने तक पहुँच चुकी है...क्योंकि राजनीति में सब जायज है..!! और जानते है ये राजनीति हो क्यों रही..?? क्योंकि  न सिर्फ भारत देश अपितु, पूरा विश्व इस वक़्त आर्थिक मंदी के घेरे में है..!! और सब पैसा नहीं होगा तो...

खुशियों की तलाश अध्याय 2 भाग 1

 यार अब तुम्हारी शादी कर दें तो जिम्मेदारी पूरी हो मेरी..!! आप सोच रहे होंगे कि ये क्या है...मैं किसकी शादी करवाने लग गया..तो मेरी प्रिय जनता जनार्दन ये मेरे शब्द नहीं...ऋषभ के पिता के शब्द है..!! जी हाँ वही ऋषभ जिसे आपने मेरे उपन्यास #खुशियों_के_तलाश #अध्याय_1 में पढ़ा था..!! अब उसके जीवन के #अध्याय_2 की शुरुआत हो चुकी है...जिसका #भाग_1 लेकर आपके सामने हूँ...!! माँ के देहांत के बाद सब कुछ बस चल रहा था...!! ऋषभ का, पिता का, ऋषभ के भाई भाभी का..!! मृत्यु दुःखदाई होती है सभी के जीवन में...ऋषभ सभी को यह बताया करता था कि उसकी माँ हमेशा कहा करती थी कि जीवन में सभी इच्छाओं की पूर्ति के बाद इच्छामृत्यु सम्भव है...और जब मां की लगभग सभी इच्छाएं पूर्ण हो चुकी थी सिवाय ऋषभ की शादी के तो ऐसे में...माँ का देहांत हो जाना तो काफ़ी दुखदाई था..क्योंकि ऋषभ ने माँ के सपनों के लिए ही तो आशा से प्रेम विवाह नहीं किया था..!! और अब जब विवाह की बारी आई तो माँ का आकस्मिक निधन😢 सब कुछ मानो रूठ सा गया था...फिर भी उसके पिता ने माँ की जिम्मेदारी को निभाते हुए... किचन में खाना बनाते वक्त एक दिन कहा-  यार अब ...

व्यापार नहीं प्यार

 देश व्यापार से नहीं प्यार से महान बनेगा..!! भय, लालच, क्रोध की वजह से आज समाज जातियों, धर्मो, क्षेत्रो, लिंगो के भेदभाव में अलग होता जा रहा है...!! इसका दुष्परिणाम यह देखने को मिल रहा है कि न तो आप स्वयं खुश है और न ही समाज खुश है..!! यदि आपको स्वयं को खुश रखना है और अपने जीवन के असली मूल्य को पहचानना है..!! आप सभी के जीवन को खुशियों से भरने के लिए ही राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा संगठन का निर्माण हुआ है..!! जो कि पूर्णतया निःशुल्क है..जहां सिर्फ प्यार बांटा जाता है...किसी भी इंसान को व्यापार की दृष्टिकोण से नहीं देखा जाता है..!! क्योंकि हमारा देश भारत अपनी संस्कृति व संस्कार से महान बना है न कि किसी व्यापार से..!! #NSSUI सन्गठन दलाली नहीं करता..!! इसीलिये दलालों को अच्छी शिक्षा देने का भरसक प्रयास करता है..!! जीवन में पैसे कमाने का लक्ष्य सभी का है और उस पैसे से खरीदी जाते है सामान और उस सामान से मिलता है सुख..!! लेकिन उन सभी की सीमाओं से बढ़कर जिनकी इच्छा बढ़ती जाती है वह है आपकी लालसा..!! आप सभी के साईकल के बाद बाइक, फिर कार, फिर और बड़ी कार के सपने होते है...खाने और पहनने में भी आपके...

Fast Food

 #fastfood  ये तुम खा लो, मैं तुम्हारा वाला खा लेता हूँ..!! नहीं नहीं नहीं...मैं अपना खाऊँगी..!! अरे झूठा खाने से प्यार बढ़ता है...!! वो सब कहने की बात है... मेरा पेट तो नहीं भरता है..!! और न ही मुझे शेयर करने की आदत है..!! अब प्यार बढ़े चाहे न बढ़े..!! ऐसी नोक झोंक हर भाई बहन, हर दोस्त, हर रिश्ते में होती है...बहुत कम ऐसे लोग होते है...जो अपना निवाला दूसरों के सामने पेश करते है..!! जिंदगी के सफर में ऐसे चलना भी एक नाम याद में छोड़ जाता है..!! कि वो ऐसी थी, वो वैसी थी... © Nikhil S Yuva

दोस्ती का पंचनामा

#दोस्ती_का_पंचनामा दोस्ती का दम भरने वालों को आज समय न मिल पाया..!! सोचना कि तुम्हारा प्रेम कहाँ है..?? जिस प्रेम के पीछे तुम भाग रहे हो, वो निराधार है..!! जिस किसी को दोस्ती के रिश्ते के बारे में जानना है, रुकिये थोड़ा समझाते है..!! आप अपने जीवन की आधारशिला माँ पिता से सबसे पहला प्रेम पाते है, उसके पश्चात आप अपने बड़ो से प्रेम पाते है...उसके बाद आप जो उनसे पाते है, उसे दूसरों को जब देते है तो उससे आपको दोस्ती नाम का रिश्ता मिलता है..!! उसके बाद प्यार नाम का रिश्ता बनता है और फिर शादी विवाह जैसे बंधनों में बंधकर दोस्ती का रिश्ता अन्य रिश्तेदारों में बदल जाता है..!! फिर आप नए रिश्तों को जन्म देकर माँ पिता बन जाते है...और फिर एक नई वंशावली तैयार होती है..!! तो क्या समझे दोस्ती से ही शुरू होता है आपका प्रेम जो आप दूसरों को देते है...उससे पहले आप मां व पिता, भाई-बहन से प्रेम पा रहे होते है..!! और जिस प्रेम को देकर आपने सभी को पाया था, आज वो लोग आपसे सवाल उठा रहे है...कि कहाँ गया वो प्रेम, जो तुम हमसे किया करते थे..?? प्रेमिका/प्रेमी से पूछा तो जवाब आया- वैलेंटाइन डे हम मनाते है..!! हम मिलते ...

खुशियों की तलाश भाग 16

  ऋषभ सबकी माँ को अपनी माँ मानता था..!! प्रेम की इंतिहान देखिये उसकी...!! और आज उसकी माँ नहीं थी..!! #खुशियों_की_तलाश #सुमन_स्मृति #भाग 16 ऋषभ की माँ के आकस्मिक निधन के पश्चात ऋषभ अकेला पड़ गया था, अब उसको खाना खिलाने वाले हाथ भी न थे, और न ही हाथ बांधकर मारने वाले हाथ..!! ऋषभ के पिता भी पोस्टमार्टम हाउस पहुँचे तो जो उनका साथ छोड़कर गयी उनकी पत्नी थी , उन्होंने अपने प्रेमी को देखा था, वो अब उनकी दुनिया मे नहीं थी..!! लेकिन दूसरा प्रेम उनका बेटा भी था, वो चाहते तो अपना गम अपने बेटे के साथ बांट सकते थे लेकिन उन्होंने अपना दुःख नहीं बांटा..!! ऋषभ उनके दुःख को समझ सकता था, पर ऋषभ के दुःख को समझने वाला कोई नहीं था...ऋषभ के सिर से साया उठ गया था माँ की ममता के आँचल का..!! भाई रात में लौटा, उसने भी आते ही सबसे पहले माँ की अंतिम यात्रा की तैयारी शुरू कर दी...बीमार तो थे वो भी, पर पहले जिम्मेदारी उसके बाद शरीर देखता था वो..!! उसने भी जिम्मेदारी पूर्वक सारे काम काज में लग गया, जैसे ऋषभ की दवाईयाँ लाना, अपनी पत्नी के लिए दवाएँ लाना, मां की तेरहवीं के लिए संसाधन जुटाना क्योंकि ऋषभ को ...

खुशियों की तलाश भाग 15

बिस्तर पर बीमार होकर मरने से बेहतर बिना तकलीफ के मर जाना होता है..!! अपने घर के बुजुर्गों व समाज की हालत देखकर यह बात ऋषभ की माँ सुमन हमेशा कहा करती थी..!! सुमन ने भी काफ़ी वक़्त बिस्तर पर बिताया था, लेकिन उसकी हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी कि इतना कुछ उसके साथ होने के बाद भी वो चलायमान थी, उसने हिम्मत नहीं छोड़ी थी... और कहते भी है कि जीवन इच्छा अनुरूप ही चलता है..!! जब तक जीने की इच्छा हो तब तक आप जी सकते है, आपने हिम्मत छोड़ी तो शरीर आपका साथ छोड़ देता है..!! सुमन अस्पताल में लेटे लेटे हजारों संबंधों के ताने बाने बुन रही थी, उसके पास सिवाय उसके बेटे ऋषभ के कोई भी मौजूद नहीं था, वो अपने पति, अपने बेटे-बहु, अपनी बहनों, अपने देवरों, अपने भाईयों जैसे हर एक रिश्ते को याद कर रही थी, क्योंकि तत्कालीन कोरोनाकाल में उसने कईयों के परिवार जनों में गमी का संदेश सुना था..!! कोरोनाकाल में मरीज का इलाज़ नाम मात्र का चल रहा था क्योंकि डॉक्टर तक को नहीं पता था कि इस बीमारी का इलाज़ क्या है..?? सरकारी तंत्र चुनाव में मस्त था, स्वास्थ्य विभाग उस तंत्र से अछूता कैसे रह सकता है, दवाएं और इलाज़ भी चुनावी वादों की तरह...

खुशियों की तलाश भाग 14

मुझे समझना हर किसी के बस की बात नहीं..और जो समझ नहीं सका वो समझदार नहीं..!! ऐसे विचारों को अपने मन में बैठाए हुए ऋषभ अपनी जिंदगी को बेहतरीन बनाने के लिए इवेंट मैनेजमेंट कंपनी और एनजीओ के बेहतरीन मिश्रण का प्लान बना चुका था..!! उसके मन में सामाजिक सुधार करने की प्रेरणा जो कि उसकी माँ के द्वारा उसे मिलती थी, वो उसे एक नया रूप देना चाहता था जिससे समाज में विकास और एकरूपता व्याप्त हो जाएगी ऐसा उसका मानना था..!! उसने शादी विवाह, जन्मदिन, मृत्यु संस्कार जैसे सभी इवेंट्स को सामाजिक प्रेम की अवधारणा से बिज़नेस का स्वरूप देना चाहा, और उसने समाज के बीच में संदेश देना चाहा कि जिस किसी ने भी प्रेम किया है समाज से, वो हर एक व्यक्ति इस काम में उसका साथ दें और ऐसे कार्यक्रमों में हर सम्भव मदद करें जिससे उस व्यक्ति विशेष का मनोबल बढ़ सकें..!! जिसके ऊपर ऐसे कार्यक्रमों में पैसों व शारीरिक बल का भार आ जाता है..!! लेकिन ऐसी सोच पर काम करने वाले ऋषभ के जीवन में तूफान लाकर खड़ा कर दिया, उसकी खुशियों की तलाश की लाशों के ढ़ेर में एक ऐसा इंसान शामिल हो गया जो उसके जीवन का ही आधार था..!! जी हाँ---- ऋषभ की माँ ...

खुशियों की तलाश भाग 13

जब दर्द हद से ज्यादा बढ़ जाता है, तो आपके पास सिर्फ दो विकल्प होते है एक डॉक्टर और एक भगवान..!! डॉक्टर के पास जाने पर आपको अधिक पैसे खर्च करने पड़ते है और भगवान के पास जाने के लिए थोड़े कम पैसे लगते है..!! अब आप सोच रहे होंगे कि भगवान के पास जाने के लिए पैसे कहां लगते है..?? तो शायद आपने ध्यान न दिया होगा, मंदिर में प्रसाद भी उन्हीं को मिलता है जो या तो प्रसाद खरीदते है या तो चढ़ावा में न्यूनतम 5 रुपये/10 रुपये चढ़ाते है..!! तो ऋषभ को कैसे मिल जाता..?? जी हाँ ऋषभ जब नोटबन्दी से बिखरा हुआ सामान समेट रहा था तब उसको उसके जीवनसंगिनी आशा के साथ जीवन जीने में असफलता हाथ लगी थी, जिसे आपने पिछले भाग में पढा था..उसी वक़्त उसको तलाश थी ऐसे डॉक्टर या भगवान की जो उसके दर्द को कम कर देता..!! डॉक्टर के पास जाने से ऋषभ घबराया करता था क्योंकि बचपन से वो डॉक्टर के पास जाते जाते समझ चुका था कि उसका पूर्णतया इलाज़ हो पाना सम्भव नहीं..!! और कई बार उसे भगवान के द्वारा राहत भी मिल चुकी थी तो उसे विश्वास हो चला था कि सबका मालिक एक है..!! इसीलिये उसने भगवान का रास्ता अख़्तियार किया..!! भगवान के मिलने की भी राह आसान न...

खुशियों की तलाश भाग 12

जिनसे हम प्यार करते है वो सब तो आज भी सही है मेरी नजर में...!! बस एक मैं ही नहीं सही..!! ये पढ़कर आपको ख़ुद का एहसास हो गया होगा...और नहीं हुआ है तो आगे आने वाली जिंदगी में हो जाएगा..!! ये #खुशियों_की_तलाश का #भाग 12 है...वही भाग 12 जो आपकी जिंदगी में हुआ होगा या होगा...!! मैं आपकी कक्षा 12 के दौर की बात कर रहा हूँ...जिस वक्त आपके जीवन में कई राहों ने चौराहा बनाने का प्रयास किया होगा..!! एक तरफ मित्र होगा, एक तरफ जीवनसंगिनी, एक तरफ पढ़ाई और एक तरफ़ आपका परिवार..!! और इन्हीं सबसे मिलकर आपने अपना समाज बनाया होगा...और यही समाज ऋषभ का भी था..!! ऋषभ के जीवन में मित्रों, जीवनसंगिनी व पढ़ाई की स्थिति आपने पिछले भागों में पढ़ी है..!! और ये भी आपके समझ में आ गया होगा कि ऋषभ जिन खुशियों की तलाश में भटक रहा था वो पूरी नहीं हो पाई है..!! ऋषभ भटकता जा रहा था, लेकिन प्रयास करना उसका बन्द नहीं हुआ था..!! उसे आज भी पूरी आशा है कि उसकी खुशियों की तलाश जरूर पूरी होगी..!! और आपकी खुशियों की तलाश भी..!! ऋषभ के कक्षा 12 के समय का दौर है..!! पढ़ाई में अव्वल ऋषभ अपने मित्रों व जीवनसंगिनी को समय दिया करता था और साथ ...

राष्ट्रहित में विवेचना

पूर्व इतिहास में धार्मिक आधार पर राष्ट्र की मांग से भी नहीं सुधरे है लोग...अब लगने लगा है कि दलिस्तान, खालिस्तान, हिंदुस्तान और एक नया पाकिस्तान बनवाकर ही मानेंगे..!! #1906 #मुस्लिमलीग #1915 #हिन्दू_महासभा #1940 #खालिस्तान_किताब #2006 #दलिस्तान_वेबसाइट ये चार प्रमुख बिंदु है हैश टैग में जिसे आप गूगल के माध्यम से खोज सकते है और समझ भी सकते है कि अपना देश भारत कैसे गुलामी की ओर फिर से बढ़ता जा रहा है..!! सत्यता तो ये है धार्मिक उन्माद से भी खतरनाक है जातीय उन्माद..!! भारत की राजनीतिक दृष्टिकोण से..!! राजनीति का मतलब ही होता है राज करना, उसके लिए आपको ग़ुलाम बनाने का हर संभव प्रयास किया जाएगा..!! धर्म, जाति, सम्प्रदाय, रंग, लिंग भेद के नाम पर बांटना इतिहास में उल्लेखनीय है उसके बाद भी आपकी आंखों पर पट्टी बंधी है, और आप ये साबित करने के लिए कि आपका वाला धर्म या आपकी वाली जाति ने ही सत्कर्म किये बाकी सब का विरोध करना सही है तो यही राजनीति का विषय ही है..!! और इसे ही राजनीति कहते है..!! और आप करिये..!! करिये क्योंकि गुलाम तो आप है ही, अपनी तुच्छ मानसिकता के..!! और हां हमसे जरा दूर...

खुशियों की तलाश भाग 11

राजनीति बहुत प्रभावशाली होती है आपकी जिंदगी में..!! हर किसी को यह कहना बहुत आसान होता है कि हमें बिल्कुल नहीं पसन्द राजनीति...लेकिन वह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से राजनीति कर रहा होता है या राजनीति का शिकार हो रहा होता है..!! जी हाँ ऋषभ की जिंदगी को भी राजनीति ने काफ़ी प्रभावित किया है..!! और आपकी अच्छी खासी जिंदगी को नरक बनाने में भी राजनीति का प्रभाव आपको देखने को मिल जाएगा..!! अब आप सोच रहे होंगे कि यह कैसे सम्भव हो सकता है..?? आपको तो नेतागिरी से मतलब ही नहीं, तब कैसे राजनीति आपको या ऋषभ को प्रभावित कर रही..तो थोड़ा इत्मीनान रखिये, आज के इस भाग 11 में आपको आपकी जिंदगी में राजनीति का प्रभाव दिखाई पड़ने लगेगा..!! #खुशियों_की_तलाश #राजनीतिक_प्रभाव  ऋषभ मासूमियत और संस्कार से परिपूर्ण अपनी जिंदगी को जीने की जदोजहद में था...ऋषभ कक्षा 6 में अपने स्कूल का मेरिट में रहने वाला छात्र जब मित्रों की श्रृंखला का निर्माण कर रहा था, तब उसकी घनिष्ठ महिला मित्र पूजा और उसके घनिष्ठ पुरुष मित्र कौशल से उसका रोज का मिलना होता था..!! शिक्षा हो या खेलकूद हर चीज़ में अव्वल ऋषभ अपने आप को सम्पूर्ण करने ...